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Pawan Kalyan X Factor in Andhra Pradeshs Electoral Battle : Pranay Roy analysis


नई दिल्ली:

तेलगाना से अलग हुए आंध्र प्रदेश में इस बार इसकी 175 विधानसभा सीटों और 25 लोकसभा सीटों के लिए कड़ा मुकाबला है. इस बार, मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी वाईएस जगनमोहन रेड्डी का सामना कर रहे हैं, जबकि इस बार उनके साथ न को बीजेपी है, न ही  अभिनेता और राजनीतिज्ञ पवन कल्याण का उन्हें समर्थन हासिल है. पवन कल्याण की पार्टी ‘जन सेना’ इस बार खुद अपने दम पर चुनाव लड़ रही है, यह पार्टी तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

साल 2014 के चुनाव के आंकड़ों से पता चलता है कि नायडू की तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के वोट शेयर का प्रतिशत करीब बराबर था एवं जीत का अंतर बहुत थोड़ा था. जहां टीडीपी और उसके सहयोगी 47.7 फीसदी वोट हासिल करने में कामयाब रहे, वहीं अकेले वाईएसआर कांग्रेस को 45.4 फीसदी वोट मिले थे.

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सन 2014 के चुनाव में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच कड़ा चुनावी संघर्ष हुआ था.

कांग्रेस का वोट शेयर – कभी आंध्र प्रदेश कांग्रेस का गढ़ था लेकिन यूपीए सरकार द्वारा तेलंगाना का विभाजन किए जाने के बाद कांग्रेस पिछड़कर निचले पायदान पर पहुंच गई. कांग्रेस का वोट शेयर जहां 2004 में 50 प्रतिशत से ऊपर था वहीं 2014 में यह सबसे निम्न स्तर पर 2.8 प्रतिशत पर आ गया.

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आंध्र प्रदेश में धर्म, जाति और साक्षरता के आधार पर मतदाताओं का प्रतिशत.

सन 2014 के चुनावों में टीडीपी ने राज्य की 25 लोकसभा सीटों में से 15, वाईएसआर कांग्रेस ने 8 और बीजेपी ने दो सीटें जीती थीं. डेटा से पता चलता है कि आंध्र प्रदेश वह इलाका है जहां टीडीपी की बढ़त है लेकिन रायलसीमा क्षेत्र में वाईएसआर कांग्रेस आगे है.

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आंध्र में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस का जनाधार विभाजित है.

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि आंध्र प्रदेश में चुनावी मुकाबला कड़ा है और बदलाव को लेकर बेहद संवेदनशील है. टीडीपी के पक्ष में 5 फीसदी की बढ़त के साथ इसके 22 तक बढ़ाने की संभावना है. लेकिन वाईएसआरसीपी के पक्ष में वही 5 फीसदी, जादुई रूप से इसकी किस्मत बदल सकता है.

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वोटों में में मामूली बदलाव ने आंध्र के परिणामों पर भारी अंतर डाला

आंध्र प्रदेश में इस चुनाव में राजनीति में आए बेहद लोकप्रिय अभिनेता पवन कल्याण के प्रवेश से अपनी अप्रत्याशित मजबूती के साथ मौजूदगी दर्ज की है. वे अपने प्रशंसकों को अपने समर्थक के रूप में तब्दील करने में कामयाब हुए हैं.

सन 2014 के चुनावों में पवन कल्याण की ‘जन सेना’ बीजेपी-टीडीपी गठबंधन का हिस्सा थी. उनकी पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उसने गठबंधन को अपना समर्थन दिया था. इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि जन सेना 10 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर लेगी और यह तय करने की स्थिति में भी आ सकती है कि राज्य में सत्ता किसकी होगी.

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एक नए नेता का उदय – जन सेना के पवन कल्याण

आंध्र प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा दोनों के लिए चुनाव 11 अप्रैल को एक ही चरण में होंगे. मतों की गिनती 23 मई को होगी.



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