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Bihar Shelter Home case: Supreme Court rebukes Ministry of Women and Child Development


नई दिल्ली: बिहार शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार से चाइल्ड प्रोटक्शन पॉलिसी बनाने के लिए कहा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से चिंतित हैं कि शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों का शोषण तो नहीं हो रहा है. कोर्ट ने पूछा है कि पॉक्सो संबंधी केसों में राज्यों में कितने फीसदी मामलों में सजा हुई है.

TISS के ये बताने पर कि पॉक्सो के 1575 केस हुए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसी नीति बनाने की जरूरत है जिससे अपराध को रोका जा सके.

बिहार शेल्टर होम मामले में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया. बिहार सरकार ने कहा कि रिपोर्ट मीडिया में किसी भी फॉर्म में चल सकती थी, इसलिए रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया. इससे लोगों के सतर्क होने की आशंका भी है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा कि सभी एजेंसियों का एक साथ काम करना संभव है या नहीं?

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TISS की ओर से पेश वृंदा ग्रोवर की तरफ से दो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दी गईं, जिसमें पुनर्वास को लेकर जानकारी है. साथ ही यह भी उल्लेख है कि बच्चों का भविष्य क्या हो और उन्हें मुख्य धारा में कैसे शामिल किया जाए. दूसरी रिपोर्ट सोशल ऑडिट को लेकर है. बिहार में 110 शेल्टर होम हैं जिनका सोशल ऑडिट छह महीने में होना चाहिए. इसमें बाल आश्रम और वृद्ध आश्रम दोनों शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल मंत्रालय से पूछा कि रिपोर्ट तैयार करते समय क्या उन्होंने बच्चों से बात की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें रिपोर्ट दिखाएं जिसमें बच्चों से बात करते हुए उनके द्वारा शारीरिक या यौन उत्पीड़न की शिकायत की गई हो. हम ये जानना चाहते हैं कि बच्चों की स्थिति कैसी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ये जानना चाहते हैं कि बच्चे खुश हैं या नहीं. अगर खुश नहीं हैं तो क्यों?

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सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों के लिए आपने क्या किया? जो बच्चे यौन उत्पीड़न के शिकार हुए उनका क्या हुआ? आप कह रहे हैं कि आपने एक साल पहले राज्य सरकार को रिपोर्ट दी थी. उसका क्या हुआ? क्या राज्य सरकार ने उसका पालन किया? अगर ऐसी रिपोर्ट है, उसके बाद भी सरकार ने काम नहीं किया तो ये उसकी लापरवाही को दर्शाता है. सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा कि आप क्या डील कर रहे हैं और हलफनामा आपने क्या दाखिल किया है?

बिहार शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि जब एडवायजरी का पालन नहीं होता तो आप इसे जारी क्यों करते हैं. क्यों न आप डे टू डे बेसिस पर NGO द्वारा चलाए जाने वाले शेल्टर होम की निगरानी करें और मुजफ्फरपुर जैसी घटनाओं को रोकने के लिए शेल्टर होम में सीसीटीवी लगाएं. इसके साथ ही बिहार सरकार को भी इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था.

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक व सोशल मीडिया को निर्देश दिए हैं कि देशभर यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों की तस्वीरें, वीडियो किसी भी तरह नहीं दिखाई जाएंगी. सोशल मीडिया से ऐसे नाबालिग के वीडियो तस्वीरें हटाई जाएं.



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